मन ही मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र और शत्रु - प्रो. एच.एस प्रसाद

 


नज़र न्यूज नेटवर्क संवाददाता

वाराणसी। डीएवी पीजी कॉलेज के दर्शनशास्त्र विभाग के तत्वावधान में आज ‘बौद्ध धर्म में नैतिकता की अवधारणा‘ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एच.एस प्रसाद ने कहा कि गौतम बुद्ध ने धम्म पद में कहा है कि मन ही सर्वप्रथम है, यही मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र है और यही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु भी है। बौद्ध धर्म में यह स्पष्ट है कि दुःख ही जीवन का परम सत्य है और इस सत्य से दूर नही हुआ जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि हमें ज्ञान प्राप्त करना है तो स्वयं को तैयार करना होगा। जीवन में आगे बढ़ना है तो अपनी प्राथमिकता तय करें और उसी पर आत्मकेन्द्रित रहे, तभी जीवन की सार्थकता सिद्ध हो सकेगी। उन्होंने कहा कि मन के अन्दर उठ रहे कठिन से कठिन प्रश्नों का भी सरलता से जवाब दे दे वहीं दर्शन का सार है। भारतीय संस्कृति में कुछ भी बनावटी नही है, वह पूर्णतया प्राकृतिक है। यही भारतीय दर्शन की सत्यता है जो इसे पाश्चात्य दर्शन से अलग करती है।  

इससे पूर्व संगोष्ठी का शुभारंभ मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर मार्ल्यापण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्वागत उप प्राचार्य प्रो. सतीश कुमार सिंह ने किया। संचालन डॉ. संजीव वीर सिंह प्रियदर्शी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संजय कुमार सिंह ने दिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रो. मिश्रीलाल, डॉ. राकेश कुमार द्विवेदी, डॉ. हबीबुल्लाह, डॉ. इन्द्रजीत मिश्रा, डॉ. बन्दना बालचन्दनानी, डॉ. रामेन्द्र सिंह, डॉ. चन्दन पाण्डेय, डॉ. रविकान्त त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।

 

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