शिक्षक ही होते हैं, युवाशक्ति के निर्माता

 


उच्च शिक्षा में उभरती चुनौतियाँ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 


नज़र न्यूज़ नेटवर्क

वाराणसी। अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र कशी हिन्दू विश्वविद्यालय में शैक्षिक जगत के समक्ष उच्च शिक्षा में उभरती चुनौतियाँ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन शुक्रवार को किया गया। राष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लेने वाले कुल 100 से अधिक प्रतिभागी हैं।  संगोष्ठी में 15 विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान भी हुए।   इस संगोष्ठी का उद्देश्य वर्तमान समय में तथा आने वाले दिनों में शैक्षिक जगत के समक्ष उच्च शिक्षा में उभरती चुनौतियों को चिन्हित करने तथा उनके समाधान हेतु सार्थक विमर्श व भावी कार्ययोजना क्या हो इस पर विचार मंथन करना है। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि भारत के पूर्व राष्ट्रपति महामहिम श्री रामनाथ कोविंद थे। आई.यू.सी.टी.ई. गवर्निंग बोर्ड के चेयरमैन प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। 




मुख्य अतिथि महामहिम श्री राम नाथ कोविंद जी ने अपने सम्बोधन में राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा की शिक्षक ही युवाशक्ति के निर्माता होते हैं तथा शिक्षक को शिक्षा व्यवस्था में मूलभूत सुधारों के केंद्र में होना चाहिए। अपने सम्बोधन में महामहिम जी ने सीखना सिखाना और वर्त्तमान में जीने पर बल दिया और कहा की चिंतन मनन करना ही शिक्षक का कार्य है। महामहिम ने कहा कि सीखने के लिए हर व्यक्ति को अहंकार रहित रहते हुए तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा और उसके प्रयोग के महत्त्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सभी स्तरों पर शिक्षकों को हमारे समाज के सबसे सम्मानित और आवश्यक सदस्यों के रूप में फिर से स्थापित किया जाना चाहिए क्योंकि वे वास्तव में नागरिकों की हमारी अगली पीढ़ी को आकार देते हैं। 

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत ने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र में शिक्षाविदों की नियति है कि वे आंतरिक या बाह्य प्रत्येक चुनौती का समाधान प्रस्तुत करें जिनका लोग या राष्ट्र सामना कर सकते हैं। एकेडेमिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने भीतर उम्मीदों के आलोक में देखना है। इसके लिए इतिहास, विरासत, संस्कृति, ज्ञान निर्माण और पीढ़ीगत परंपरा के गहन अध्ययन की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षाविदों का आह्वाहन किया कि वे अपनी साख को पुनर्स्थापित करने के लिए और उच्च शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता को एक बार फिर से उन्नत स्तर पर पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत करें। 

स्वागत भाषण देते हुए हुए केंद्र  निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने राष्ट्रीय संगोष्ठी की आवश्यकता व रूपरेखा से प्रतिभागियों को अवगत कराया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आलोक में आई.यू.सी.टी.ई. के दायित्वों से अतिथियों एवं प्रतिभागियों को परिचित करवाया।  मंच संचालन डॉ. रचना विश्वकर्मा व स्वागत केंद्र निदेशक प्रो प्रेम नारायण सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन केंद्र के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हरीशचंद्र ने किया। संयोजन डॉ. दीप्ति गुप्ता व सह संयोजन डॉ. कुशाग्री सिंह ने किया।

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